पारसनाथ अर्घ्य
निर्गंध अक्षतान पुष्प चरु लीजिए,
दीप धुप श्रीफलादी अर्घतैंजजिये.
पारसनाथ देव सेव आपकी करू सदा,
दीजिए निवास मोक्ष भूलिए नहीं कदा.